***********मजहब कब तक ?***************
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अभी आपको प्यास नहीं है, जब प्यास होगी
तो भागोगे, फिर न नदी देखोगे और न नाला
देखोगे, ना पंडित और न मोलवी !
जहाँ पानी मिलेगा और जिसके पास मिलेगा
वाही से मांग लोगे और बार बार हजार बार मांगोगे
प्रार्थना करोगे ! अब तुम ये न देखोगे की ये हिन्दू
है, या फिर मुस्लिम अब फुर्सत कहा जाती पंथ पूछने की
अब तो खुद ही कहोगे अरे पानी का मजहब कही होता है !
खी भूखा प्यासा आदमी मजहब देखा है ? अभी तो वो प्यास
वो भूक उत्पन ही नहीं हुई , इसीलिए तो ये सब नखरे और
भेद तुम्हे दिखाई दे रहे है !! और जिस दिन प्यास उत्पन होगी
उई दिन उसी समय अन्दर जो मजहब की सीमाए समाप्त होजाएगी !
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अभी आपको प्यास नहीं है, जब प्यास होगी
तो भागोगे, फिर न नदी देखोगे और न नाला
देखोगे, ना पंडित और न मोलवी !
जहाँ पानी मिलेगा और जिसके पास मिलेगा
वाही से मांग लोगे और बार बार हजार बार मांगोगे
प्रार्थना करोगे ! अब तुम ये न देखोगे की ये हिन्दू
है, या फिर मुस्लिम अब फुर्सत कहा जाती पंथ पूछने की
अब तो खुद ही कहोगे अरे पानी का मजहब कही होता है !
खी भूखा प्यासा आदमी मजहब देखा है ? अभी तो वो प्यास
वो भूक उत्पन ही नहीं हुई , इसीलिए तो ये सब नखरे और
भेद तुम्हे दिखाई दे रहे है !! और जिस दिन प्यास उत्पन होगी
उई दिन उसी समय अन्दर जो मजहब की सीमाए समाप्त होजाएगी !
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