*जब उस परमतत्त्व के अनुरूप बुद्धि हो, तत्त्व के अनुरूप प्रवाहित मन हो, परमतत्त्व परमात्मा में एकीभाव से उसकी रहनी हो और उसी के परायण हो इसी का नाम ज्ञान है। इस ज्ञान द्वारा पापरहित हुआ पुरुष पुनरागमनरहित परमगति को प्राप्त होता है। परमगति को प्राप्त, पूर्ण जानकारी से युक्त पुरुष ही पंडित कहलाते हैं।*
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