Baba Mahakal
Sunday, March 11, 2012
है प्रेम जगत में सार
प्रेम नगर की रहनी हमारी ,सतगुरु उसमें प्रेम के सागर !
सागर के ये करुणा बादल ,भरते हम सब की गागर !!
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