Tuesday, December 27, 2011

आधुनिक शिक्षा....गर्त की ओर

                                                     ||  ॐ तत्सत्  ॐ  ||                                                 


आज समाज दूषित हो चुका है |
चारों तरफ अशांति फ़ैल रही है ...............................................
भ्रष्टाचार फ़ैल रहा है .....................................................
नैतिक पतन हो रहा है ................................................
धर्म का ह्रास हो रहा है .....................................
कारण है .........आज की  शिक्षा व्यवस्था  
जब बच्चा जन्म लेता है तो जैसे माता -पिता समझ लेते कि पैसा कमाने की  मशीन  आ गया है |आज ढाई साल के  बच्चे को इंगलिशमीडियम  विद्यालयों में भर्ती करा दिया जाता है , बच्चा  अपनी उम्र से दुगना भारी बैग  लेके विद्यालय जाता है |
माता- पिता इस आकांक्षा से विद्यालय भेजते है कि बच्चा पढ़ -लिख ले और योग्य होकर खूब पैसा कमाए |बचपन से ही  बच्चे की परवरिश इसी उद्देश्य से की जाती है |२०-२२ की उम्र के होने तक उस बच्चे पर पैसा    कमाने का दबाव बनाया जाने लगेगा |
        इस पैसा कमाओ  की महत्वाकांक्षा आज विद्यालय में भी बढ़ाये जाते है |ना जाने कितने कान्वेंट स्कूल खुल हुए है, बिना योग्यता के बने फर्जी शिक्षक ,फर्जी मान्यता लेकर, अच्छी फीस लेकर  बच्चो को मात्र  डिग्री पाने ,जैसे तैसे  पैसा कमाने  कि मशीन बनने- बनाने कि शिक्षा  देते है |
         और बच्चा जो बचपन से ही पहले माता-पिता द्वारा मिले दबाव  उनकी इच्छा  सुनता  आ रहा है ,फिर विद्यालयों में मात्र  किस तरह से अच्छे नंबर आए ,नक़ल से चाहे बोर्ड ऑफिस में सांठ  -गांठ से ,साथ ही शिक्षकों कि पैसा कमाने कि चेष्टा  देखता है ,सीखता है उसकी  पैसा कमाने की महत्वाकांक्षा  इतनी ज्यादा  बढ़  चुकी होती है  कि बच्चा बड़ा होकर 'येन केन प्रकारेण' पैसा कमाने कि चेष्टा करता है |उसे मात्र पैसों से मतलब होता है क्योकि उसे कभी भी नैतिक  शिक्षा नहीं मिली ,मार्गदर्शन नहीं मिला ,अच्छे -बुरे में अंतर् पहचानने की शिक्षा नहीं दी गयी | वह तो मात्र पैसा जानता  है ,उसे पैसा चाहिए  चाहे जैसे |
    जीना सिखाया नहीं गया इसलिए कोई शांति ,आनन्द से जी नहीं रहा  है |यही कारण है हम पतन कि ओर उन्मुख है ,उन्नत हम आज भी नहीं है |धर्म ,नैतिकता ,सदाचार तो आज शिक्षा में शामिल ही नही  है | अधिकांश  माता-पिता  और विद्यालय पैसा , स्वार्थ ,अहंकार में स्वयं तो अंधे है ही आने वाली पीढ़ी को  यही शिक्षा दिए जा रहे है | आज की शिक्षा में शामिल है स्वार्थ ,अधर्म ,पैसे की पीछे भागना और  अनैतिकता |
देश,समाज,नैतिकता,धर्म  के कर्तव्य  तो सीखा ही नही ......बालको ने सीखा तो मात्र पैसा कमाने की युक्ति |
पैसा कमाने की इस  महत्वाकांक्षा  के कारण ही भ्रष्टाचार फ़ैल रहा है..................................
उन्नति नहीं हो रही है .........................
देश आज भी गरीब है .....................
न्याय मिलना मुश्किल  हो गया है............
अच्छी चिकित्सा  सुविधा सिर्फ अमीरों के लिये सुलभ है .............
गरीब मेधावी बच्चो कि उच्च शिक्षा पाना दुर्लभ  है ..............
योग्य शिक्षकों द्वारा ही शिक्षण हो  | धर्म ,नैतिकता ,सदाचार ,सत्कर्मो की शिक्षा दी जाये | देश,समाज की उपयोगिता जन के लिये और जनों की उपयोगिता देश और समाज के लिये बताई जाए |महत्वाकांक्षा सत्कर्मो की दी जाये ना की धन की |
  लेकिन धर्म से  तात्पर्य यह बिल्कुल नहीं है कि  हिंदू धर्म,इस्लाम धर्म के  झूठे अहंकार में मार-काट की जाये ,एक दूसरे  को नीचा दिखाया जाए |हम धर्म से नही है बल्कि धर्म हमसे है |अगर हम ही नही रहे तो धर्म कहाँ से होगा ? धर्म पालन  करेगा कौन  ?
धर्म मनुष्यता के लिये है, मनुष्य के लिये है |मनुष्य  धर्म के लिये कतई नहीं है |
 जिससे स्वयं का, नैतिकता का, देश और समाज का कल्याण हो ,हर कोई सुखी हो ,संपन्न हो, सदाचार हो ,शांति हो वही धर्म है और इसे ही  अपनाना  चाहिए |
  धर्म वह है जिससे सुख -शांति फैले ,जन कल्याण हो, उन्नति हो |
जिस धर्म से धर्म छिन्न-भिन्न हो जाये  मनुष्यता को चोट पहुचे वह धर्म नहीं ,वह धर्म का नाम होते हुए अधर्म ही है |
                सर्वे भवन्तु सुखिनः,सर्वे सन्तु निरामया:   |
          सर्वे भद्राणि पश्यन्तु ,मा कश्चिददुखभाग्भावेत्   |
इसी मूल मन्त्र का पालन करना चाहिए |        
  
                                                             जय महाकाल 

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